मिट्टी मन...
मन नित बैठे मिट्टी बनकर nचुपके चुपके चाको परnकुछ बना लो कुछ सजा दो nऐ मेरे प्रिय कुम्हार ।।nnबचपन का खिलौना बनकर nनन्हे हाथों मे सज जाउnकोई बचपन मुझे पुकारेnकरे बार-बार मनुहार ।।nnसौधी सौधी खुशियां लेकरnढल जाऊ मै कूल्हण मेnदेसी बाबू पी कर चायnकरे प्रशंसा बारम्बार ।।nnगुलदस्ता या बनु गुलिस्ता nगुलदानो का का धरू आकार nया सिधी साधी मिट्टी बनnमिल मिट्टी मे निराकार ।।nnअनजानी सी पहचानी सीnदेवो देवी की मूरत बन जाउnकरै भक्त जन पूजन अर्चनnश्रद्धा से करै पुकार ।।n
मन नित बैठे मिट्टी बनकर
चुपके चुपके चाको पर
कुछ बना लो कुछ सजा दो
ऐ मेरे प्रिय कुम्हार ।।
बचपन का खिलौना बनकर
नन्हे हाथों मे सज जाउ
कोई बचपन मुझे पुकारे
करे बार-बार मनुहार ।।
सौधी सौधी खुशियां लेकर
ढल जाऊ मै कूल्हण मे
देसी बाबू पी कर चाय
करे प्रशंसा बारम्बार ।।
गुलदस्ता या बनु गुलिस्ता
गुलदानो का का धरू आकार
या सिधी साधी मिट्टी बन
मिल मिट्टी मे निराकार ।।
अनजानी सी पहचानी सी
देवो देवी की मूरत बन जाउ
करै भक्त जन पूजन अर्चन
श्रद्धा से करै पुकार ।।