Poetry
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मिट्टी मन...
मन नित बैठे मिट्टी बनकर nचुपके चुपके चाको परnकुछ बना लो कुछ सजा दो nऐ मेरे प्रिय कुम्हार ।।nnबचपन का खिलौना बनकर nनन्हे हाथों मे सज जाउnकोई बचपन मुझे पुकारेnकरे बार-बार मनुहार ।।nnसौधी सौधी खुशियां लेकरnढल जाऊ मै कूल्हण मेnदेसी बाबू पी कर चायnकरे प्रशंसा बारम्बार ।।nnगुलदस्ता या बनु गुलिस्ता nगुलदानो का का धरू आकार nया सिधी साधी मिट्टी बनnमिल मिट्टी मे निराकार ।।nnअनजानी सी पहचानी सीnदेवो देवी की मूरत बन जाउnकरै भक्त जन पूजन अर्चनnश्रद्धा से करै पुकार ।।n