हिंद की बेटी
POETRY
मैं हिंद की बेटी,
कलम चलाकर लिखती,
मैं हिंद की बेटी हिंद के दिल को लिखती हूं।
पूरब से पश्चिम को, उत्तर से दक्षिण को लिखती।
लिखती उन रंगों को जो किसी की ख़ुशी में बिखरते हैं।
Jo Kisi ke liye barsate
हन मैं हिंद की बेटी कलम चला कर लिखती