भूले बिसरे गीत
आज बहुत वर्षों के बाद 65 वर्षीया स्मृति ने अपना पुराना कबड्ड खोला।सब चीजों को धीरे-धीरे साफ करने लगी।अब अकेले करती भी क्या?कुछ समय पहले ही उसके पति सुधीर की मृत्यु हुई थी।बहु -बेटा काम पर चले जाते थे और पोता,रोनित स्कूल।
सामान साफ करते हुए उसे अपना पुराना रेडियो दिखा।मर्फी का रेडियो।उसको बाहर निकाला और झाड़कर साफ किया।साफ करते ही मानो स्मृति की यादों पर पड़ी धूल भी साफ हो गयी।उसकी शादी का पहला साल।वो पल तो उसके स्मृति पटल पर अंकित था।
लगभग 42 साल पहले स्मृति की शादी सुधीर से तय हुई।सुधीर नागपुर में काम करता था।दहेज की उनकी कोई मांग नही थी।स्मृति के माता-पिता ने समृति को उसकी शादी में मर्फी का रेडियो दिया।वो जानते थे कि स्मृति को गाने सुनने का कितना शौक था।
शादी करके वह सुधीर के साथ नागपुर आ गयी।ससुराल तो उसी के शहर में था लेकिन सुधीर नागपुर में अपनी नौकरी के कारण अकेले ही रहता था।
तो स्मृति के साथ उसका रेडियो भी आ गया।सुधीर ने देखा कि स्मृति ने उसको एक सुंदर सी टेबल पर लगा दिया और कनेक्ट कर दिया।
सुधीर -- स्मृति,सुना है कि तुम्हे गाने सुनने का शौक है?
स्मृति --जी।
सुधीर --कौन सा प्रोग्राम फ़ेवरेट है तुम्हारा?
स्मृति --भूले बिसरे गीत।
सुधीर --ओह्ह मतलब पुराने गाने सुनती हो?
स्मृति--बहुत पसंद है।लता मंगेशकर,आशा भोंसले,मन्ना डे..आप गाने नहीं सुनते?
सुधीर --सुनता हूं ना।और अब तो हम दोंनों साथ मे सुनेंगे।
स्मृति मुस्कुराने लगी।उस दिन के बाद से स्मृति लगभग सारे दिन काम के साथ साथ गाने सुनती रहती।सुधीर भी कभी-कभी रेडियो चला लेता।उसको बिनाका गीतमाला पसन्द था।जब भी बिनाका गीतमाला शुरू होता..साथ मे सुधीर शुरू हो जाता
सुधीर-- वाह।स्मृति जब भी अमीन सयानी की आवाज़ सुनो मन तरोताज़ा हो जाता है।तुम सुनती हो।
स्मृति --जी।हमेशा।उनकी आवाज़ तो मुझे भी बहुत पसंद है।
देखते-देखते उनकी शादी को सात महीने हो गए और अक्टूबर में स्मृति का जन्मदिन आ गया।लेकिन स्मृति को सुधीर ने बधाई ही नहीं दी। उसको तो ये याद भी नहीं था कि आज 29 अक्टूबर को स्मृति का जन्मदिन है।बहुत से सपने देखे थे स्मृति ने इस दिन के लिए।लेकिन..
रोज़ की तरह सुधीर ऑफिस चला गया।स्मृति ने रेडियो लगा लिया।हमेशा की तरह गाने सुनने लगी।एनाउंसर बोला,"अब आप सुन रहे हैं-- भूले बिसरे गीत।कुछ गाने चलते रहे। तभी एनाउंसर ने बोला...
एनाउंसर --आज की विशेष फरमाइश,नागपुर से सुधीर मिश्र जी की उनकी पत्नी स्मृति मिश्र के लिए।अपने इस गाने द्वारा वो अपनी पत्नी को जन्मदिन की ढेर सारी बधाई देना चाहते हैं।
बार बार दिन ये आये,
बार बार दिन ये गाए,
तू जिये हज़ारों साल ये मेरी है आरज़ू।
हैप्पी बर्थडे टू यू......
स्मृति रेडियो और अपना नाम सुनकर हैरान रह गयी।और अचानक पीछे से आकर उसको सुधीर ने गले लगा लिया।
सुधीर (मुस्कुराते हुए)--जन्मदिन की बहुत सारी शुभकामनाएं,स्मृति।हैप्पी बर्थडे।कैसा लगा मेरा तोहफा?
स्मृति(खुशी से) --आप ऑफिस नहीं गए?
सुधीर --पहले बताओ तोहफा कैसा लगा?
स्मृति --मुझे तो लगा था..
सुधीर --कि मुझे तुम्हारा जन्मदिन याद नहीं।हा हा हा।ऐसा हो सकता है क्या?
स्मृति --ये सब?
सुधीर -- एक हफ्ता पहले से ही फरमाइश भेज दी थी।
स्मृति --बहुत अच्छा तोहफा था।इतना प्यारा..
सुधीर --सच मे??
स्मृति-- जी।
सुधीर --तो चलो आज मेरी छुट्टी है।सारा दिन बाहर घूमेंगे,खाना बाहर और शाम को एक साथ रेडियो सुनेंगे।भई मैं अपना बिनाका गीतमाला नही छोड़ सकता।जल्दी तैयार हो जाओ।
स्मृति तैयार हो गयी।दोनो सारा दिन बाहर घूमे,लंच किया और सुधीर ने स्मृति को तोहफा भी दिया।शाम तक दोनों घर वापिस आ गए।आते ही सुधीर ने रेडियो लगा लिया।
सुधीर--अमीन सयानी आने वाले हैं।आई कैंट मिस हिम।दो कप चाय ले आओ।दोनों साथ बैठकर प्रोग्राम सुनेंगे।स्मृति ने चाय बनाई और फटाफट आ गयी।
अमीन सायानी--भाइयों और बहनों,मैं हूँ अमीन सयानी अपने कार्यक्रम बिनाका गीत माला के साथ।
कई गानों के बाद एक गाना आया..
अमीन सयानी--आज की पायदान नंबर 5 पर है ये गाना...फ़िल्म खुद्दार का...
अंगेज़ी में कहते हैं कि आई लव यू,
गुजराती मा बोले तमे प्रेम ...
सुधीर ने स्मृति को उठाया और साथ मे डांस करने लगा।स्मृति का ये जन्मदिन सबसे यादगार दिन बन गया।उस दिन के बाद ऐसा कोई जन्मदिन नही गया जिसमें सुधीर ने उसके लिए गानों की फरमाइश ना की हो।यहां तक कि बदले हुए समय के साथ एफ एम पर भी वह कभी अपने गाने की फरमाइश करना नहीं भुला।
स्मृति की आंखों में आज आंसू थे क्योंकि आज उसका जन्मदिन था लेकिन वो हर साल रेडियो पर गाने की फरमाइश करने वाला उसके साथ नहीं था।बस स्मृति अपने मर्फी रेडियो को एकटक लगाये देख रही थी।
समाप्त