माँ

माँ ~ a poetry about Mother

Cover artwork for माँ
POETRY

क्षण भर भी देर हो जाती तो किवाड़ पे टकटकी लगाये रहती, हमारी माँ,
प्रशंसा करते न थकती..आगे बढ़ने को प्रोत्साहित करती..ऐसी थी हमारी माँ।

इन आँखों की उदासी पल भर में भाँप लेती,
नए नए नामों से हमें बुलाती..
हमेशा हँसती-मुस्कुराती रहती- ऐसी थी हमारी माँ।

पिछले कुछ सालों में, गिरते-संभालते आगे बढ़ते, रिश्तों की पहचान हुई...
एक छोटी सी खरोंच भी लगती तो 'आहा रे-आहा रे', बोलती हमारी माँ।

अब उस तरह का इंतज़ार कोई न करता।
अब उस तरह का प्यार कोई न करता,
जैसे करती थी हमारी प्यारी माँ।


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