Hotel room

a horror story

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SHORT STORIES

रश्मि ने सनराइज़ लॉज के कमरा नंबर 12 में एंटर किया ही था कि उसको कुछ अजीब सा एहसास हुआ।लेकिन उसने ध्यान नहीं दिया।इतने में रूम सर्विस कर्मचारी उसका सामान लेकर आ गया।

रश्मि(टिप देते हुए)--यहाँ अभी कोई था क्या?ओह्ह हां नाम ...(नाम का बैच पढ़ते हुए) रघु।
रघु --जी नहीं मैडम।अभी तो कोई नहीं था।पर मैडम एक बात कहूँ आपको?
रश्मि --हां बोलो।
रघु --जो भी इस कमरे में रुकता है ,वो कहता है कि उसने यहां किसी को देखा।
रश्मि --मतलब?
रघु --भूत ,मैडम जी।
रश्मि -- व्हाट नॉनसेंस।भूत कहा से आ गया।
रघु-- अच्छा मैडम जी।कोई काम हो तो ये रही बेल।आप मुझे बुला लेना।
रश्मि --हम्म।ठीक है।

रघु चला गया।रश्मि ने अपना सामान एक साइड पर रखा और रूम देखने लगी रूम काफी अच्छा था।सब सुविधाओं से पूर्ण।
रश्मि ऊटी कुछ दिन शहर से दूर शांत वातावरण में आराम करने आई थी। सनराइज़ लॉज रश्मि को अच्छा लगा जो ऊटी की वादियों के बीच मे बना था।

रश्मि ने खिड़की खोल कर बाहर देखा।बहुत ही मनोहारी जगह थी।वह वापिस आकर चेयर पर बैठ गयी।अचानक कमरे के दरवाज़े पर किसी ने नॉक किया।रश्मि ने सोचा कि रूम सर्विस है।उसने दरवाज़ा खोला।सामने एक हैंडसम लड़का खड़ा था।

रश्मि --जी कहिये।
लड़का -- जी मैं अनिल..अनिल गुप्ता।
रश्मि --जी कहिये।
अनिल -- जी वो अभी थोड़ी देर पहले ही मैंने चेक आउट किया था।पर शायद मेरा कुछ सामान यहां छूट गया है ।
रश्मि --पर मुझे तो यहाँ कुछ नहीं दिख रहा।

इतने में रघु आ गया।

रश्मि--रघु ,ये यहाँ थे क्या?
रघु --जी मैडम। सुबह ही गए थे,अनिल बाबू।क्या हुआ?
रश्मि --कह रहे हैं कि इनका कुछ सामान यहाँ रह गया है।
रघु --देख लीजिए अनिल बाबू।मैडम जी,देख लें क्या?
रश्मि --ठीक ही रघु।तुम दो चाय ले आओ।अनिल जी आप देख लीजिए।

अनिल ने कमरा टटोलना शुरू किया।कभी अलमारी,बेड के नीचे।

रश्मि --क्या खोज रहे हैं? क्या मैं कुछ हेल्प करूँ?
अनिल --एक मेरे घर की चाबियां थीं।शायद पॉकेट से निकलकर गिर गईं।और एक फाइल,ग्रीन कलर की।
रश्मि --मुझे तो अभी तक कुछ नहीं दिखा।

रघु चाय लेकर आ गया।

रश्मि -- रघु दो चाय बना दो।
अनिल --अरे आप क्यों तकल्लुफ़ कर रही हैं।मैं तो अब जा ही रहा हूं।
रश्मि --कोई बात नहीं।बाहर बहुत ठंड है।और शाम भी है।आप चाय पी कर जाइये।

दोनों चाय पीने लगे।बातें भी शुरू हो गईं।

रश्मि -- आप अक्सर यहाँ आते हैं?
अनिल --जी हर साल।वाईफ के साथ।यही पास के शहर में तो रहता हूँ।
रघु --जी मैडम।साहब,हमेशा आते हैं।परिवार के साथ।

रघु चला गया।

अनिल-- और आप?
रश्मि --मैं तो ऊटी पहली बार ही आयी हूं।बस कुछ समय शहर की भाग दौड़ से दूर रहना चाहती थी।
अनिल --हां ये तो है।कभी कभी अपने साथ रहने का भी मन करता है।Thank you for the tea. अब मैं चलता हूं।
रश्मि-- Nice meeting you.
अनिल--Same here.Bye.लगता है मेरा सामान कही गाड़ी में ही होगा या रास्ते मे ढाबे पर देखता हूँ।वाईफ का मैसेज आया कि चाबियां तो मिल गयी है।Thank you.
रश्मि --बहुत अच्छी बात है।Bye.

अनिल चला गया।पर उसका ओवरकोट वही चेयर पर रह गया।रश्मि उसके पीछे भागी।रेस्प्शन पर मैनेजर था।

मैनेजर --क्या हुआ,मैडम?
रश्मि --ये कोट देना था।
मैनेजर --जी किसको?
रश्मि --जी वो अनिल जी को।वो आपके कस्टमर अभी अपना सामान ढूंढने आये थे।प्लीज़ रघु को बुलाइये।वो दे आएगा।
मैनेजर --कौन रघु मैडम?कौन अनिल जी।यहां कोई नहीं है।
रश्मि --कैसी बातें कर रहे हैं?रघु आपका हाउस कीपर।यहीं तो था।
मैनेजर --मैडम यहाँ कोई रघु नहीं है।बस ये मुरारी है।
रश्मि --जी नहीं।रघु ने मेरा सामान रखा रूम मे।मैंने उसको टिप दी।अनिल के आने पर वो चाय लाया।रघु,रघु..
मैनेजर --आपका सामान तो इस मुरारी ने रखा था।आपने टिप भी दी थी इसको।चाय भी यही ले गया था।इसने कहा भी कि इसने दो कप चाय बनाई।आप अकेले अकेले ही बुदबुदा रही थीं जैसे किसी से बात कर रही हों। ना तो यहां कोई नहीं आया।मुरारी ज़रा गार्ड को बुला।उसको कहो रजिस्टर लाये।

गार्ड अंदर आया।

मैनेजर --मैडम को बताओ अभी यहाँ कोई आया था क्या?अनिल नाम का।रजिस्टर दिखाओ इनको।
गार्ड --नहीं ऐसा कोई नही आया।ये देखिये रजिस्टर।

रश्मि ने रजिस्टर देखा।वहां कोई एंट्री नहीं थी।ये देखकर रश्मि के चेहरे का रंग फीका पड़ गया।

मैनेजर --यहां कोई रघु है?
गार्ड--वो तो 5 साल पहले था।उसकी तो एक्सीडेंट में मौत हो गयी थी।यहीं सामने की सड़क पर।शायद यहीं इसी लॉज का कोई कस्टमर था।वो भी मर गया था। सांमने से ट्रक आ रहा था।गाड़ी का संतुलन खराब हो गया।पहले वो रघु से गाड़ी टकराई और फिर खाई में गिर गयी।क्यों मैडम,कुछ हुआ क्या?
रश्मि -- न न नहीं।कुछ नहीं।मैं चलती हूँ।आप म मेरा ब ब बिल बना दीजिए।
मैनेजर -- मैडम,पर क्यों?आप तो 5 दिन के लिए आई थीं।मैडम सुनिए तो।

रश्मि रूम की तरफ जाने लगी।उसको अब कुछ सुनाई नहीं दे रहा था।बस अनिल और रघु की आवाज़ें सुनाई दे रही थीं।

समाप्त

©निधि शर्मा


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