ghazal
gazal ke kuch sher share kr rha hu nhope u enjoy
ग़मो का कोई सिलसिला हो गया हूँ ,
मैं सच हो गया हूँ ,वफ़ा हो गया हूँ,
जहाँ जाऊ मुझे ही देखता है ज़माने ,
तेरी कमर की कोई मैं अदा हो गया हूं
जो रुखसत हुई थी वो ज़िंदा है मुझमे,
किसी रुखसार की मैं ,हया हो गया हू
सभी पाप मेरे भुलाये ज़माना,
मैं गंगा में धुल के नया हो गया हूँ,
मैं हर ठोकरों पे यही सोचता हूं,
में अब्बा से कितना बड़ा हो गया हू
मेरे दिल की बस्ती ,सियासत बोहोत हैं
हैं अबके इलेक्शन खड़ा हो गया हूँ।।
शुक्रिया